Monday, September 21, 2026

जीवन क्या यही है!

 

जीवन क्या यही है!


जीने की जद्दोजहद में

मन का मर्मांतक मरण
सुबह की प्रतीक्षा में
गहन तमस में शरण

अपनों की भीड़ में
बेगानेपन की महक
परिचय के नीड़ में
अनजानेपन की चहक

सुखस्वप्नों में सोकर
आंसुओं में जागरण
चक्र यही चलता है
अनवरत आमरण।

जीवन क्या यही है!


~ मीमांसा 


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