आत्म मीमांसा
तू है तो सहीपर.. कहां?
तू है तो सही
पर.. कहां?
तू!मेरे शब्दों से परेमेरी सोच से आगेमेरे दुखों से गहरामेरी आत्मा से पुरातनमेरे गीतों से गहनमेरी दुनिया से विस्तृतमेरे आश्रय से विराटऐ मेरे आह्लाद!तू है तो सहीपर.. कहां?
तू!
मेरे शब्दों से परे
मेरी सोच से आगे
मेरे दुखों से गहरा
मेरी आत्मा से पुरातन
मेरे गीतों से गहन
मेरी दुनिया से विस्तृत
मेरे आश्रय से विराट
ऐ मेरे आह्लाद!
No comments:
Post a Comment