Monday, August 17, 2026

बीज जीवन का

 

बीज जीवन का



बीज जीवन का सुलाकर
हृदय में
मुस्कुराहट मार कर मन की
जिएंगे
तू अमरता का कलश देगा हमें
विष
अहम का घोलकर ही हम पियेंगे
चाह
के ही सर्प को रस्सी समझकर हम
चढ़ेगे
आत्मा का स्फुरण पगतल कुचलकर
तू
कहे कितना भी कि 
'तू सब छोड़ मेरी शरण आ।'

हम क्यों सुनेंगे!!


~ रश्मि मीमांसा

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